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विवेक हत्याकांड को धार्मिक रंग देने पर केजरीवाल को कल्पना तिवारी का सबक

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विवेक हत्याकांड से शहरवासी शोक में हैं। दुखी परिवारीजन को हर कोई ढांढस बंधा रहा है, वहीं न्याय दिलाने के लिए छात्र से लेकर सभी लामबंद हुए हैं। ऐसे में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस हत्याकांड को जाति-धर्म में बांधकर नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। राजधानी के लोगों ने केजरीवाल के उस ट्वीट को ‘सियासी जहर’ करार देकर माफी मांगने की मांग की है, जिसमें उन्होंने इसे जातिवादी रंग देने की कोशिश की थी। खुद मृतक की पत्नी कल्पना तिवारी ने उन्हें करारा जवाब दिया है।

हत्याकांड में ‘सियासी जहर’ 

शनिवार को आप नेता संजय सिंह ने कल्पना से मुलाकात की थी। फिर केजरीवाल ने कल्पना को फोन कर सांत्वना दी। थोड़ी ही देर में ट्विटर पर केजरीवाल ने विवेक को एक हिंदू की हत्या करार देकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने जाति-धर्म से हत्या को जोड़कर लोगों से बीजेपी से सावधान रहने के लिए कहा। इस पर कल्पना का कहना है इसे जाति धर्म से नहीं जोडऩा चाहिए। कल्पना के भाई विष्णु ने भी गुस्से का इजहार करते हुए कहा कि हम लोग घटना से पूरी तरह टूट चुके हैं और वह इसे धर्म से जोड़कर राजनीति कर रहे हैं। यह आहत करने वाला ट्वीट है।

केजरीवाल के ट्वीट को शर्मनाक 

कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक ने केजरीवाल के ट्वीट को शर्मनाक बताया और वह हत्या पर सियासत करना बंद करें। इस कृत्य के लिए वह परिवार व राजधानीवासियों से माफी मांगें। सुन्नी धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का कहना है कि इस घटना को किसी धर्म से जोडऩा सरासर गलत है। दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, लेकिन सियासी लोगों को ऐसे नाजुक मामले पर सोच-समझ कर बोलना चाहिए। मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि कुछ लोग हर घटना से अपनी सियासत चमकाने का मौका तलाशते हैं, जो इंसानियत के खिलाफ है।

केजरीवाल का विवादित ट्वीट

विवेक तिवारी तो हिंदू था? फिर इसको उन्होंने क्यों मारा? भाजपा के नेता पूरे देश में हिंदू लड़कियों का दुष्कर्म करते घूमते हैं? अपनी आंखों से पर्दा हटाइए। भाजपा हिंदुओं की हितैषी नहीं है। सत्ता पाने के लिए अगर इन्हें सारे हिंदुओं को कत्ल करना पड़े तो ये दो मिनट नहीं सोचेंगे।

केजरी को कल्पना का जवाब

इस पर सियासत नहीं करना चाहिए। केजरीवाल इतने जिम्मेदार आदमी हैं, वह ऐसा कैसे कह सकते हैं। मैं इसे समर्थन नहीं करती। मोदी सरकार ने कभी जातिवाद को बढ़ावा नहीं दिया। उन्होंने हर वर्ग, हर तबके का ध्यान रखा है। इस बात को सभी राजनीतिक दलों को ध्यान रखना चाहिए। संवेदनाओं का राजनीतिकरण न हो। विवेक पहले भारतीय हैं, फिर हिंदू।

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