You are here
Home > News > कर्नाटक में लिंगायत और वोक्कालिया समुदाय तय करेगा राजनीतिक पार्टियों का भविष्‍य

कर्नाटक में लिंगायत और वोक्कालिया समुदाय तय करेगा राजनीतिक पार्टियों का भविष्‍य

नई दिल्ली [सुरेंद्र प्रसाद सिंह]। कर्नाटक का गन्ना उत्पादक मांड्या संसदीय क्षेत्र वैसे तो हमेशा सुर्खियों में रहता है, लेकिन इस समय मांड्या अपनी चुनावी हलचल की वजह से चर्चा में है। यहां राजनीतिक कड़वाहट चरम पर पहुंच गई है। राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कु मार स्वामी के बेटे निखिल को कन्नड़ फिल्मों की अभिनेत्री सुमालता मात देने की तैयारी में है। निखिल यहां से जनता दल सेकुलर (जदएस) और कांग्रेस के संयुक्त प्रत्याशी हैं, जो मुश्किलों के दौर में घिरे हुए हैं। राज्य की गठबंधन सरकार के बीच बढ़ी कटुता का आलम यह है कि कांग्रेस के टिकट पर यहां से सांसद रहे कन्नड़ फिल्मों के सुपर स्टार अंबरीष की विधवा निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में जदएस को चुनौती दे रही हैं। भारतीय जनता पार्टी ने यहां से अपना प्रत्याशी उतारने की जगह निर्दलीय सुमालता के समर्थन कर खेल को और चुनाव को और रोचक बना दिया है। मांड्या और हासन संसदीय क्षेत्र में गुरुवार को हुए मतदान के रुझान से पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोतों के लिए अपनी राजनीतिक विरासत को बचा पाना आसान नहीं होगा।

मांड्या प्रक्षेत्र राज्य का बड़ा गन्ना उत्पादक है। गन्ने की खेती में पानी की कमी को लेकर कावेरी नदी के पानी के बंटवारे का मुद्दा बड़ा बनकर उभरता है। राजनीतिक तौर पर यह संसदीय क्षेत्र बेहद संवेदनशील भी है। लिंगायत व वोक्कालिया समुदाय के लोगों के बीच जबर्दस्त तनातनी रहती है। यहां होने वाले चुनावों में प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला इन्हीं समुदायों की इच्छापर निर्भर करता है। मुख्यमंत्री देवेगौड़ा वोक्कालिया समाज से ताल्लुक रखते हैं। लेकिन उनके बेटे के खिलाफ ताल ठोक रहीं निर्दलीय सुमालता भी इसी समाज से हैं। भारतीय जनता पार्टी वोक्कालिया समुदाय के धार्मिक मठ चुनचुनगिरी से संपर्क रही है। मांड्या सीट पर हुए 18 बार के लोकसभा चुनाव में 12 बार कांग्रेस, तीन बार जदएस, दो बार जनता दल और एक बार जनता पार्टी चुनाव जीती है।

पिछले लोकसभा चुनाव में जनता दलएस के केसीएस पुत्ताराज को 5.24 लाख वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस की प्रत्याशी राम्या को 5.18 लाख। हालांकि 2018 में हुए उपचुनाव में जद एस के एलआर शिवरामगौड़ा ने जीत हासिल कर ली। मांड्या सीट के दायरे में आने वाली सातों विधानसभा सीटों पर फिलहाल जनता दल एस का कब्जा हो गया है। लेकिन गठबंधन के भीतर सब कुछ अच्छा नहीं चलने और भाजपा के खुले समर्थन की वजह से निर्दलीय सुमालता की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

चुनाव के दूसरे चरण की कवरेज करने पहुंचे जागरण संवाददाता ओमप्रकाश तिवारी ने बताया कि मांड्या और हासन जैसी वीआइपी सीटों पर देवेगौड़ा परिवार की तीसरी पीढ़ी के दोनों युवा राजनेता निखिल और प्रांजल सांसत में हैं। मतदान के रुझान से हालत और भी खराब दिखने लगी है। पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा के दोनों पोतों पर चुनावी खतरे की जद में आ गये ह

source dainik jagran

Leave a Reply

Top