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केजरीवाल ने शीला दीक्षित को दी चुनौती, बोले- एक साल मोदी राज में दिल्ली चला के दिखा दो

source – jagran.com

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पूर्व सीएम शीला दीक्षित के बीच सियासी जंग तेज तेज हो गई है। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाए जाने की मांग को लेकर ‘आप’ और कांग्रेस के बीच वार- पलटवार जारी है। केजरीवाल ने शीला दीक्षित को चुनौती दी है कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज में दिल्ली में सरकार चलाकर दिखाएं।

‘आप’ पर वार 

सीएम केजरीवाल का ऐसा बयान शीला दीक्षित के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि जिसे काम करने की इच्छा नहीं होती है वो इस तरह के बहाने बनाता है। हालांकि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन पहले ही यह कह चुके हैं कि दिल्ली सरकार काम करने के बजाए रोज नए-नए बहाने खोजती रहती है।

मोदी सरकार में कामकाज करके दिखा दें

अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि ‘शीला जी आप के जमाने में दिल्ली का क्या हाल था। ऐसा लग रहा है कि आपको कुछ याद नहीं है। सड़क, बिजली और पानी के लिए आम जनता तड़पती थी। दिल्ली की जनता का रो-रो कर बुरा हाल था। सरकारी स्कूल मनमाने तरीके से स्कूल की फीस बढ़ा देते थे। लेकिन आप कुछ नहीं कर पाती थीं। ये तो तब था जब 10 साल तक आपके एलजी थे। वो चैलेंज करते हैं कि एक बार मोदी सरकार में कामकाज करके दिखा दें।

एकमात्र तरीका संविधान में बदलाव

गौरतलब है कि शीला दीक्षित ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि जब तक संविधान में बदलाव नहीं होता, तब तक दिल्ली आंशिक रूप से केंद्र द्वारा शासित ही रहेगी। उन्होंने कहा, ‘अब जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं, वे (आप) अधिकारों की कमी के बारे में बात कर रहे हैं। यह सिर्फ एक बहाना है। वह राज्य के मुद्दों और संविधान के बारे में जानते थे।’ शीला ने कहा, ‘दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने का एकमात्र तरीका संविधान में बदलाव है। अगर वे ऐसा करने में सक्षम हैं, तो ठीक है। नहीं तो दिल्ली केंद्र सरकार द्वारा आंशिक रूप से शासित एक केंद्र शासित क्षेत्र है और रहेगी।’

भाजपा के साथ किया काम 

शीला दीक्षित ने केजरीवाल की टिप्पणी पर फिर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने न केवल कांग्रेस के साथ, बल्कि केंद्र में भाजपा के साथ तालमेल बिठाकर काम किया था। उन्होंने कहा, ‘हमने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार और मनमोहन सिंह सरकार दोनों के साथ तालमेल से काम किया था।’ दीक्षित ने कहा, ‘हमने भी पूर्ण राज्य की मांग की थी, लेकिन हम सफल नहीं हुए।’ पूर्व मुख्यमंत्री ने 2019 लोकसभा चुनाव में ‘आप’ के साथ गठबंधन की सभी संभावनाओं को खारिज कर दिया।

source – jagran.com

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