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मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग की तैयारी में विपक्ष, जानिए- क्या है प्रक्रिया

source – jagran.com

केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने के साथ-साथ विपक्ष ने देश के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने की भी तैयारी कर ली है। माना जा रहा है कि कांग्रेस, राकांपा, वामदल के कुछ नेताओं ने महाभियोग के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिया है। राकांपा के सांसद माजिद मेमन ने इसकी पुष्टि की। मंगलवार की देर रात तक जरूरी 50 सांसदों के हस्ताक्षर लेकर एक-दो दिनों में ही राज्यसभा में नोटिस दिया जा सकता है।

हालांकि इसकी संभावना कम है क्योंकि विपक्ष के एक गुट का मानना है कि ऐसा प्रस्ताव लाने से पहले विस्तार से चर्चा कर लेनी चाहिए। कांग्रेस में भी कानून के जानकार कुछ नेताओं का मानना है कि ऐसे प्रस्ताव से न्यायपालिका को गलत संदेश जा सकता है। इसे न्यायपालिका में राजनीतिक हस्तक्षेप तक माना जा सकता है।

…तो दीपक मिश्रा पहले मुख्य न्यायाधीश होंगे

ऐसे में अगर विपक्ष आगे बढ़ता है तो दीपक मिश्रा पहले मुख्य न्यायाधीश होंगे जिनके खिलाफ ऐसा प्रस्ताव आएगा। इससे पहले दो न्यायाधीशों (कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जज सौमित्र सेन और पीडी दिनाकरन) के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव आया था। यूं तो जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग की बात वामदल की ओर से तब उठाई गई थी जब जनवरी में सुप्रीम कोर्ट के चार जजों (जस्टिस जे.चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी. लोकुर और कुरियन जोसेफ) ने उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। लेकिन पिछले दो-तीन दिनों में संसद के अंदर विपक्ष ने इसे धार दी है। बताते हैं कि कांग्रेस की ओर से इसकी शुरुआत की गई ताकि दूसरे दल भी इसका समर्थन करें।

प्रशांत भूषण ने तैयार किया ड्राफ्ट

वकील प्रशांत भूषण ने इसका एक ड्राफ्ट तैयार किया और सूत्रों के अनुसार राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा, राकांपा के शरद पवार, वंदना चव्हाण, प्रफुल्ल पटेल समेत कई नेताओं ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। तृणमूल कांग्रेस को भी इसमें साथ जोड़ने की कोशिश हुई। माना जा रहा है कि तृणमूल की ओर से समर्थन का आश्वासन भी दिया गया है। लेकिन उनके हस्ताक्षर हुए या नहीं इसकी पुष्टि नहीं हुई। मंगलवार को ममता बनर्जी ने कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं से मुलाकात की थी। बताते हैं कि उसमें भी इस पर चर्चा हुई।

कथित मसौदे में आरोप

कथित ड्राफ्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ पांच आरोप लगाए गए हैं। इसमें प्रसाद एजुकेशन ट्रस्ट जैसे मुद्दे शामिल हैं। विपक्षी सदस्यों के बीच महाभियोग के लिए कथित मसौदे में दीपक मिश्रा पर प्रशासनिक अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप है। यह भी आरोप है कि उन्होंने वांछित फैसले के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील कुछ मामलों की सुनवाई खास जजों को सौंपी है। मुख्य न्यायाधीश की अगुआई वाली पीठ अयोध्या विवाद जैसे महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई कर रही है। जस्टिस लोया का मामला उनकी ही पीठ सुन रही है। जस्टिस दीपक मिश्रा अक्टूबर में रिटायर कर रहे हैं।

ऐसे लाया जाता है महाभियोग

महाभियोग प्रस्ताव के लिए लोकसभा में 100 और राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों का हस्ताक्षर जरूरी होता है। प्रस्ताव पारित होने के बाद पीठासीन अधिकारी की ओर से तीन जजों की समिति का गठन किया जाता है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और किसी एक कानूनविद् को शामिल किया जाता है। समिति आरोपों की जांच करती है और आरोप साबित होने पर सदन में प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति उसे पद से हटा देते हैं।

source – jagran.com

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